FD Backed Loan Is Forgotten – फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD पर लोन लेना जरूरत के समय पैसे जुटाने का एक तरीका है। इसमें ग्राहक को अपनी जमा राशि तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती और बैंक उसी FD को सुरक्षा के तौर पर रखकर लोन या ओवरड्राफ्ट की सुविधा देता है। लेकिन अगर कोई ग्राहक समय पर लोन की किस्त या ब्याज चुकाना भूल जाए, तो बैंक क्या कर सकता है? ऐसी स्थिति में सबसे अहम बात यह है कि FD पर बैंक का अधिकार और लोन की शर्तें क्या हैं…
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बैंक पहले बकाया चुकाने को कह सकता है
लोन की तय तारीख पर भुगतान न होने पर रकम बकाया मानी जा सकती है। बैंक ग्राहक को एसएमएस, ईमेल, फोन या नोटिस के जरिए भुगतान की याद दिला सकता है। बकाया कितने समय तक रहने पर आगे की कार्रवाई होगी, यह लोन के प्रकार और समझौते की शर्तों पर निर्भर करता है।
FD के बदले लिए गए लोन में जमा रकम बैंक के पास सुरक्षा के तौर पर रहती है। इसलिए भुगतान में चूक होने पर बैंक के पास सामान्य असुरक्षित लोन की तुलना में वसूली का एक अतिरिक्त विकल्प हो सकता है। बैंक के अधिकारों और ग्राहक की जिम्मेदारियों का विवरण लोन एग्रीमेंट में दिया जाता है।
बैंक FD से बकाया रकम समायोजित कर सकता है
अगर ग्राहक लगातार भुगतान नहीं करता, तो बैंक लोन एग्रीमेंट में दी गई शर्तों के अनुसार FD की रकम से बकाया समायोजित कर सकता है। कुछ मामलों में बैंक जमा को समय से पहले बंद करके भी वसूली कर सकता है। इस रकम से बकाया मूलधन, लागू ब्याज और समझौते के मुताबिक अन्य देय शुल्क चुकाए जा सकते हैं।
मान लीजिए, किसी व्यक्ति ने 5 लाख रुपये की FD के बदले 4 लाख रुपये का लोन लिया है। अगर भुगतान न करने पर बैंक अपने अधिकार का इस्तेमाल करता है, तो वह FD से बकाया राशि समायोजित कर सकता है। लेकिन यह उदाहरण केवल समझाने के लिए है—वास्तविक वसूली, ब्याज और शेष रकम का हिसाब बैंक की शर्तों और खाते की स्थिति पर निर्भर करेगा।
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क्या FD का पूरा पैसा चला जाएगा?
जरूरी नहीं। बैंक आम तौर पर उतनी रकम समायोजित करता है जितनी लोन खाते में बकाया है और जिसकी वसूली का अधिकार उसे समझौते के तहत है। अगर FD की रकम बकाया से ज्यादा है, तो समायोजन के बाद बची रकम ग्राहक को मिल सकती है। वहीं, अगर बकाया रकम FD की उपलब्ध राशि से ज्यादा हो, तो शेष देनदारी ग्राहक पर रह सकती है।
इसलिए यह मान लेना सही नहीं है कि एक किस्त छूटते ही पूरी FD जब्त हो जाएगी। कार्रवाई का तरीका, नोटिस की जरूरत और बैंक द्वारा FD को समय से पहले बंद करने की प्रक्रिया संबंधित लोन दस्तावेजों और लागू नियमों से तय होती है।
FD पर ब्याज मिलता रहेगा या नहीं?
लोन चलने के दौरान FD आम तौर पर अपनी तय शर्तों के अनुसार ब्याज कमाती रहती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहक लोन का भुगतान टाल सकता है। FD पर मिलने वाला ब्याज और लोन पर लगने वाला ब्याज अलग-अलग होते हैं। यदि लोन का ब्याज समय पर नहीं चुकाया जाता, तो बकाया बढ़ सकता है और बैंक समझौते के अनुसार वसूली की कार्रवाई कर सकता है।
कई बैंक FD पर लोन की ब्याज दर को FD की दर से कुछ अधिक रखते हैं। इसलिए ग्राहक को जमा पर मिलने वाले ब्याज और लोन पर लगने वाले ब्याज का अंतर समझना चाहिए। समय पर भुगतान करने से अतिरिक्त देनदारी और FD से समायोजन की स्थिति से बचा जा सकता है।
भुगतान में देरी का क्रेडिट स्कोर पर असर
लोन की किस्त या ब्याज समय पर न चुकाने की जानकारी बैंक क्रेडिट सूचना कंपनियों को दे सकता है। इससे ग्राहक की क्रेडिट रिपोर्ट और भविष्य में लोन लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। FD सुरक्षा के तौर पर मौजूद होने से भुगतान की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। इसलिए यह जरूरी है कि ग्राहक बैंक से संपर्क बनाए रखे और बकाया चुकाने का रास्ता निकाले।
अगर भुगतान में अस्थायी परेशानी है, तो ग्राहक बैंक से बकाया राशि, लागू ब्याज और भुगतान की समयसीमा स्पष्ट करने को कह सकता है। किसी भी बातचीत या भुगतान का रिकॉर्ड रखना भी उपयोगी है।
ग्राहक को क्या करना चाहिए?
यदि FD पर लिए गए लोन का भुगतान छूट गया है, तो सबसे पहले बैंक से संपर्क कर खाते की बकाया राशि और लागू शुल्क की जानकारी लें। लोन एग्रीमेंट में डिफॉल्ट, FD पर बैंक के अधिकार और वसूली की प्रक्रिया से जुड़े प्रावधान पढ़ें। संभव हो तो बकाया जल्दी चुकाएं और भुगतान की रसीद सुरक्षित रखें।
FD पर लोन लेने का फायदा यह है कि जरूरत के समय जमा तोड़े बिना रकम मिल सकती है। लेकिन यह सुविधा तभी लाभदायक रहती है, जब ग्राहक भुगतान की शर्तों का पालन करे। समय पर भुगतान न होने पर बैंक FD से बकाया समायोजित कर सकता है और ग्राहक को अपनी जमा रकम का कुछ हिस्सा गंवाना पड़ सकता है।