Check 5 Things Before Accepting Cheque – डिजिटल भुगतान के दौर में UPI, नेट बैंकिंग और कार्ड का इस्तेमाल बढ़ गया है, लेकिन बड़े कारोबारी लेन-देन, प्रॉपर्टी डील, उधार की रकम और व्यापारिक भुगतान में चेक का इस्तेमाल आज भी होता है। हालांकि, केवल चेक हाथ में आ जाने से भुगतान की गारंटी नहीं मिलती। चेक में तारीख, हस्ताक्षर, रकम या बैंक विवरण की छोटी-सी गलती भी भुगतान रोक सकती है…
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अगर चेक बैंक से अनादरित यानी dishonour हो जाए तो मामला Negotiable Instruments Act, 1881 की धारा 138 के तहत कानूनी विवाद तक पहुंच सकता है। ऐसे में चेक स्वीकार करने वाले व्यक्ति को इसे बैंक में जमा करने से पहले कुछ जरूरी बातों की जांच जरूर करनी चाहिए।
चेक लेते वक्त पहले जांचें ये 5 बातें –
1. तारीख सही और स्पष्ट है या नहीं
चेक पर लिखी तारीख सबसे महत्वपूर्ण जानकारी में से एक होती है। बैंक सामान्य तौर पर जारी होने की तारीख से तीन महीने के भीतर प्रस्तुत किए गए चेक को ही भुगतान के लिए स्वीकार करता है। इसलिए चेक पर तारीख साफ, सही और पढ़ने योग्य होनी चाहिए।
अगर तारीख में कटिंग, ओवरराइटिंग या अस्पष्ट लिखावट है तो बैंक चेक लौट सकता है। पोस्ट-डेटेड चेक को उस पर लिखी भविष्य की तारीख से पहले बैंक में जमा नहीं किया जा सकता। उदाहरण के लिए, अगर चेक पर 20 अगस्त की तारीख लिखी है तो उसे 20 अगस्त से पहले भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं करना चाहिए।
इसी तरह, बहुत पुराना चेक मिलने पर उसे तुरंत जमा करने के बजाय जारीकर्ता से नया चेक लेना बेहतर होता है। तारीख में बदलाव हो तो भुगतानकर्ता से उसी बदलाव के पास दोबारा हस्ताक्षर कराने के बजाय नया चेक लेना अधिक सुरक्षित रहता है।
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2. नाम, हस्ताक्षर और बैंक विवरण मिलाएं
चेक पर प्राप्तकर्ता का नाम सही लिखा है या नहीं, यह भी ध्यान से जांचें। नाम में गलती होने पर बैंक भुगतान रोक सकता है। चेक पर किया गया हस्ताक्षर भी बैंक रिकॉर्ड में मौजूद हस्ताक्षर से मेल खाना चाहिए। हस्ताक्षर में अंतर होने पर चेक dishonour हो सकता है।
अगर चेक किसी कंपनी या संस्था का है तो कंपनी का नाम, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता और खाते की जानकारी जांचना जरूरी है। किसी प्रकार की कटिंग, ओवरराइटिंग या अलग स्याही से किए गए बदलाव पर सावधान रहें। बेहतर है कि भुगतानकर्ता आपके सामने चेक भरे और हस्ताक्षर करे। इससे बाद में हस्ताक्षर या चेक में छेड़छाड़ को लेकर विवाद की संभावना कम होती है।
जहां संभव हो, जारीकर्ता की पहचान और संपर्क विवरण भी सुरक्षित रखें। अगर बैंक चेक लौटाता है तो कानूनी नोटिस या अन्य प्रक्रिया के लिए सही पता और संपर्क जानकारी जरूरी हो सकती है।
3. रकम शब्दों और अंकों में समान है या नहीं
चेक पर लिखी रकम शब्दों और अंकों दोनों में बिल्कुल समान होनी चाहिए। यदि शब्दों में एक रकम और अंकों में दूसरी रकम लिखी है तो बैंक भुगतान रोक सकता है या स्पष्टीकरण मांग सकता है।
रकम लिखने के बाद खाली जगह नहीं छोड़नी चाहिए। खाली स्थान में कोई व्यक्ति अतिरिक्त अंक या शब्द जोड़कर रकम बढ़ाने की कोशिश कर सकता है। शब्दों में रकम लिखने के बाद ‘Only’ और अंकों के बाद लाइन या डैश लगाने से छेड़छाड़ का जोखिम कम किया जा सकता है।
यह भी देखें कि चेक पर स्याही फैली हुई, लिखावट बदली हुई या कोई संदिग्ध निशान तो नहीं है। बड़े भुगतान वाले चेक में किसी भी तरह की शंका होने पर उसे स्वीकार करने के बजाय नया चेक मांगना सुरक्षित रहता है।
4. Account Payee और crossing की जांच करें
बड़ी रकम के लिए Account Payee Only चेक लेना अधिक सुरक्षित माना जाता है। ऐसे चेक का भुगतान सीधे उस व्यक्ति या संस्था के बैंक खाते में किया जाता है, जिसका नाम चेक पर लिखा है। इसे आम तौर पर किसी अन्य व्यक्ति के खाते में ट्रांसफर या नकद भुगतान के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
चेक पर दो समानांतर लाइनें बनी हों तो वह crossed cheque होता है। इसका भुगतान सीधे नकद नहीं किया जाता, बल्कि बैंक खाते के माध्यम से होता है। इससे चेक खो जाने या किसी दूसरे व्यक्ति के हाथ लगने पर दुरुपयोग का खतरा कम हो सकता है।
यदि चेक पर ‘A/C Payee Only’ नहीं लिखा है और भुगतान बड़ी रकम का है, तो भुगतानकर्ता से account payee चेक देने के लिए कहें। हालांकि, crossing होने से भुगतान की गारंटी नहीं मिलती; खाते में पर्याप्त पैसा और अन्य बैंकिंग शर्तें भी पूरी होना जरूरी है।
5. लेन-देन का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखें
केवल चेक अपने पास होना हमेशा पर्याप्त कानूनी साक्ष्य नहीं होता। चेक किस लेन-देन के बदले मिला, इसकी लिखित जानकारी भी सुरक्षित रखें। इसके लिए एग्रीमेंट, बिल, इनवॉइस, रसीद, उधार की लिखित पुष्टि और भुगतान से जुड़ी चैट संभालकर रखें।
चेक नंबर, बैंक का नाम, रकम, तारीख और जारीकर्ता का नाम मोबाइल या किसी सुरक्षित फाइल में नोट कर लें। संभव हो तो चेक की फोटो या स्कैन कॉपी भी रख लें। हालांकि, बैंक में जमा करने के लिए मूल चेक जरूरी होता है, इसलिए उसकी सुरक्षित custody भी महत्वपूर्ण है।
अगर चेक किसी उधार या कारोबारी भुगतान के लिए लिया गया है तो लेन-देन का उद्देश्य लिखित रूप में दर्ज करना भविष्य में बहुत मददगार हो सकता है। चेक बाउंस होने पर कानूनी कार्रवाई की समयसीमा और नोटिस संबंधी नियम लागू होते हैं, इसलिए बैंक की return memo और जमा रसीद सुरक्षित रखें। ऐसे मामलों में वकील की सलाह लेना बेहतर होता है।
चेक बाउंस होने पर क्या करें?
अगर चेक अनादरित हो जाता है तो बैंक से return memo जरूर लें। इसके बाद धारा 138 के तहत कार्रवाई के लिए कई कानूनी शर्तें और समयसीमाएं लागू होती हैं। केवल चेक बाउंस होना अपने आप में हर मामले में दोष सिद्ध नहीं करता; लेन-देन की वैधता, भुगतान का उद्देश्य और अन्य साक्ष्य भी महत्वपूर्ण होते हैं।
निष्कर्ष
चेक स्वीकार करते समय तारीख, नाम, हस्ताक्षर, बैंक विवरण, रकम, crossing और Account Payee निर्देश की जांच करें। साथ ही लेन-देन से जुड़े सभी दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। थोड़ी-सी सावधानी चेक बाउंस, धोखाधड़ी और अनावश्यक कोर्ट-कचहरी के जोखिम को काफी कम कर सकती है।

