Financing Scheme Eor EV Trucks-Buses – भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की कोशिश अब सिर्फ छोटी कारों और दोपहिया वाहनों तक सीमित नहीं रह गई है। सरकार भारी इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों को बढ़ावा देने के लिए एक नई फाइनेंसिंग स्कीम (Financing Scheme) लाने पर काम कर रही है। इस योजना के तहत निजी ऑपरेटर्स को इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल खरीदने के लिए लोन पर ब्याज में राहत मिल सकती है….
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अगर यह योजना लागू होती है, तो इलेक्ट्रिक बस या ट्रक खरीदने वाले ऑपरेटर्स के लिए हर महीने की ईएमआई (EMI) और लोन की कुल लागत कम हो सकती है। इससे महंगे इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल को अपनाने में आने वाली बड़ी रुकावट को दूर करने में मदद मिल सकती है।
आखिर सरकार नई स्कीम क्यों ला रही है?
भारी इलेक्ट्रिक ट्रक और बसों की कीमत अभी डीजल से चलने वाले वाहनों के मुकाबले ज्यादा है। यही वजह है कि कई निजी ऑपरेटर्स इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से पहले लागत को लेकर सोचते हैं।
केवल वाहन की कीमत ही समस्या नहीं है। नए इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल के लिए लोन और फाइनेंस (Finance) हासिल करना भी कई मामलों में आसान नहीं होता। ऐसे में ऑपरेटर को ज्यादा ब्याज दर पर कर्ज लेना पड़ सकता है। इससे इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने का कुल खर्च और बढ़ जाता है। ऐसे में सरकार अब इसी फाइनेंसिंग गैप को कम करने की कोशिश कर रही है।
यानी वाहन खरीदने में मदद के साथ-साथ उसे खरीदने के लिए सस्ता कर्ज उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।
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3.5 टन से 55 टन तक के ट्रक हो सकते हैं शामिल
प्रस्तावित योजना में अलग-अलग क्षमता वाले भारी इलेक्ट्रिक ट्रकों को शामिल करने की तैयारी है। इसमें 3.5 टन से लेकर 55 टन तक की कैटेगरी वाले इलेक्ट्रिक ट्रक आ सकते हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रिक बसों के लिए भी ब्याज में राहत देने पर विचार किया जा रहा है।
इसका मतलब है कि शहरों में चलने वाली बसों से लेकर माल ढोने वाले भारी इलेक्ट्रिक ट्रकों तक, अलग-अलग तरह के कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों को इस योजना से फायदा मिल सकता है। हालांकि, अभी योजना पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। फिलहाल इसका कॉन्सेप्ट पेपर (Concept Paper) तैयार किया गया है।
मई में प्रस्तावित योजना का बजट 9,852 करोड़ रुपये था, जिसमें 5 साल में 50,000 इलेक्ट्रिक बसों और 50,000 इलेक्ट्रिक ट्रकों के रोलआउट के लिए ब्याज सबवेंशन और क्रेडिट गारंटी प्रदान करने का प्रावधान था।
Interest Subvention से क्या फायदा होगा?
इंटरेस्ट सबवेंशन का मतलब है कि सरकार लोन के ब्याज का कुछ हिस्सा कम करने में मदद करे। मान लीजिए कोई ऑपरेटर इलेक्ट्रिक बस या ट्रक खरीदने के लिए बैंक या किसी फाइनेंस कंपनी से लोन लेता है। अगर सरकार ब्याज में कुछ राहत देती है, तो ऑपरेटर पर हर महीने पड़ने वाली ईएमआई का बोझ कम हो सकता है।
इसके अलावा पूरे लोन की अवधि में चुकाया जाने वाला ब्याज भी कम हो सकता है। इससे इलेक्ट्रिक वाहन की खरीदारी ऑपरेटर के लिए आर्थिक रूप से ज्यादा आकर्षक बन सकती है।
भारी वाहन उद्योग मंत्रालय (MHI) के अतिरिक्त सचिव हनीफ कुरैशी ने कहा कि सरकार बैंकों के साथ क्रेडिट जोखिम साझा करने के तंत्र पर काम कर रही है, जिससे इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों में निवेश को बढ़ावा मिल सके।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी राहत पर विचार
सरकार इलेक्ट्रिक बस और ट्रक के लिए प्रस्तावित फाइनेंसिंग स्कीम के तहत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी ब्याज सबवेंशन देने पर विचार कर रही है।
ऑपरेटर्स को वाहन खरीदने के अलावा चार्जिंग स्टेशन लगाने या चार्ज पॉइंट ऑपरेटर्स के साथ टाई-अप करने की भी जरूरत होती है। ऐसे में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी राहत देने से ऑपरेटर्स पर वित्तीय बोझ कम होगा।
सिर्फ सब्सिडी से नहीं बढ़ेगी EV की बिक्री
सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती यह है कि भारी इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत अभी भी काफी ज्यादा है। ऐसे में सिर्फ वाहन खरीदने पर सब्सिडी देना पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। [1
किसी बस ऑपरेटर या ट्रांसपोर्ट कारोबारी के लिए वाहन खरीदना एक बड़ा निवेश होता है। उसे वाहन की शुरुआती कीमत के साथ-साथ लोन, ब्याज, चार्जिंग, रखरखाव और दूसरे खर्चों का भी हिसाब लगाना पड़ता है। इसीलिए सरकार अब सस्ती फाइनेंसिंग को भी इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल को बढ़ावा देने का जरूरी हिस्सा मान रही है।
निष्कर्ष
केंद्र सरकार भारी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए नई फाइनेंसिंग स्कीम लाने पर काम कर रही है, जिसमें ब्याज सबवेंशन और क्रेडिट गारंटी का प्रावधान होगा।
इस योजना का उद्देश्य इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों की उच्च upfront लागत को कम करना और फाइनेंसिंग लागत में 3-4 प्रतिशत अंक के अंतर को पाटना है।
प्रस्तावित योजना में 3.5 टन से 55 टन तक के इलेक्ट्रिक ट्रक और विभिन्न क्षमता की इलेक्ट्रिक बसें शामिल हो सकती हैं। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी ब्याज राहत देने पर विचार किया जा रहा है, जिससे ऑपरेटर्स पर वित्तीय बोझ कम होगा।
